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Wanna say you Something

Okay! Now Liston to me
मैं कुछ कहना चाहता हूं
Wanna break these walls
और हवाओं में बहना चाहता हूं
Will you come with me
कोई साथ हो ना, तो अच्छा लगता है
So what you say, hummm
तुम हो तो मेरा होना सच्चा लगता है
That's why I'm waiting for you
मैं अकेला भी वैसे ठीक ठाक रहता हूं
I don't need you sooo badly
जरूरत की चीजें तो मैं बाज़ार से लेता हूं
You are not a thing for me
 इसलिए तो मैं तुमसे पूछ रहा हूं
Can we fly together
तुम सुनो ना मैं कुछ कह रहा हूं
I have a thing... love for you
Have confiance a moi
Je t'aime je t'aime


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NAYA SAVERA {Hindi Poem}

नया सवेरा क्याॅ लिखना चाहता है तु, आज लिख डाल। क्याॅ उड़ेलना चाहता है तु, आज उड़ेल डाल।। ये जो तेरे मन के भाव है, मत रोक। ये जो तेरे गगन पर निकले पांव है, मत टोक।। क्यों घिरा हुआ है तु, घोर अंधेरो में। क्यों बिखरा हुआ है तु, चिंता के फेरों में। पता है कि तु हार चुका है। उन रोशन सवेरो को भी तु नकार चुका है।। गुमनामी अब तुझे ज्यादा अच्छी लगने लगी। इसलिए, आंखे तेरी क्याॅ उंचाईयों के स्वाद भुलने लगी।। क्याॅ सूरज, अस्त के डर से रोशनी दुबारा लाता नहीं। क्याॅ पंछी, टूटने के डर से घोंसला फिर से बनाता नहीं।। शायद डर लगता है, कि फिर से ना  गिर ‌जांउ। बार-बार गिर के भी चढ़ते रहने का वो, चिंटी से साहस कैसे दिलवाउं। अरे! दिन तो चढ़ते-ढ़लते है, ये ही जीवन-चक्र है। हर रोज उजाला होता, आकाश में पंछी उड़ाने भरते हैं, ये भी निरंतर है।। खुशियों कि बारिशों में भीगना है तो, सिकुड़े क्यों हो, हाथ फैलाओ। अरे! लहराती फसल चाहते है तो, बैठे क्यों हो, बीज लगाओ।। आज ही शुरू कर तु, रूकना भूल डाल। क्याॅ...

दास्तान ए सफर "जिंदगी"2

जीवन की इस लहर में जीवन थोड़ा रुक सा गया है। तना हुआ सीना और जो गर्व था, वो सर अब झुक सा गया है। वो बीते पलों की ठंडक और अब हर एक पल की जलन; दोनों गरमा रही है। तब कोई मुश्किल आते देख मुस्कुराते थे और अब हर एक मुस्कान वो, मुरझा रही है। परंतु इस उथल-पुथल में भी अजब सा सन्नाटा है। हालातों की इस मधुर हाला को लांघु कैसे, ये समझ ना आता है। मेरी भाव-लता से रिसते आंसू को अब, बारिश भी ना छुपा पाएगी। क्रूरता की बेड़ियां तोड़ लगता है मुझे आलिंगन करने, विपदा भी खुद को छुटा ले आएंगी। आखिर इतना सह गया हूं, जिसकी गिनती कोई कर नहीं सकता। क्योंकि टूट चुका हूं इतना कि, अब और गिरने को डर नहीं लगता। जीवन की इस लहर में हां! जीवन थोड़ा रुक सा गया है। तना हुआ सीना और जो गर्व था, वो सर झुक सा गया है। लेकिन कुछ तो है इस समतल में, जहां से मैंने शुरुआत की थी। आसमां अभी भी उतना ही रोचक लगे, देख जिसे मेरे पहले सपने ने उड़ान भरी थी। पिछले प्रयासों ने तो अनुभव सिखा दिए हैं कई; तो चढूंगा जोश से दुगने और अब ऊंचाई का भय है नहीं। तब तो ऊंचाइयों को बस देखने की ललक थी। लेकिन अब छूने नहीं, अब तो आसमां को बस छेदने की सनक ही...

मेरे विचार

मेरे विचार सोचता हुॅ मैं एक साथ विचारों की एक कड़ी। उस प्रत्येक क्षण में बिखर कर पुनः बन जाती है एक लड़ी।। बहुतायत में भरे पड़े हैं यहा कई संसार । प्रयेक मे मेरे नियमों और मेरे रचना समुद्र का है प्रसार।। आखिर मेरा स्वामित्व है, मेरे इस मनके पर रखे सर्वभाग पर। फिर भी पता नहीं क्यों आखिर टूट जाता हूॅ, इस पराई दुनिया के हर एक प्रहार पर।। तब मेरे स्वयं के संसार पर नियंत्रण मेरा खो जाता है कहाॅ? मेरे द्वारा रचित ब्रह्माण्ड क्यों मुझे ही प्रतीत होता सबसे घटिया जंहाॅ।। यद्यपि जैसे-2 मिला मैं इस मानव रूपी हैवान से, इस सत्य रूपी भगवान से। मेरा मस्तक हिला, और हिला, ज्यादा हिला, समझ आया ये संसार अतिसुक्ष्म है मेरे स्वयं के अभिमान से।। व्यर्थ मे इनकी देखादेखी क्यों करे खराब हमारा व्यवहार। अरे! मुर्ख से उलझना नहीं कोइ बुद्विमता, इतना तो समझो यार।। चलो अब करलों उपर बाजुए कमीज़ की। आखि़र हमारे विचारों को ठेस पहुंचाए, हरगिस ख़ैर नहीं उस बद्तमिज की। दुनिया है खुबसुरत हमारी, इसको भी बना देंगे। अच्छा करेंगे, सच्चा करेंगे और कोई आया बीच मे ंतो उसको भी बता देंगे। अच्छे-सच्चे, रचनात्मक विचार रखेंगे।।